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इन्द्रप्रस्थ राज्य के लोकसभा क्षेत्र

इन्द्रप्रस्थ राज्य में कुल 21 लोकसभा क्षेत्र शामिल है 1. सहारनपुर 2 कैराना 3 मुज़फ्फरनगर 4 बिजनौर 5 नगीना 6 मुरादाबाद 7 रामपुर 8 संभल 9 अमरोहा 10 मेरठ 11 बागपत 12 गाज़ियाबाद 13 गौतमबुद्धनगर 14 बुलंदशहर उपरोक्त के अतिरिक्त 7 लोकसभा क्षेत्र दिल्ली में स्थित है. इस प्रकार इन्द्रप्रस्थ राज्य के देश की संसद में 21 सांसद मौजूद रहेंगे..

इन्द्रप्रस्थ राज्य के विश्वविद्यालय

वर्तमान में इन्द्रप्रस्थ राज्य में निम्नलिखित 18 विश्वविद्यालय कार्यरत है:       दिल्ली 1 गुरु गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय 2 दिल्ली विश्वविद्यालय 3 जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय 4 डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय 5 दिल्ली प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय 6 इंदिरा गांधी नेशनल ओपन विश्वविद्यालय 7 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय 8 दक्षेश विश्वविद्यालय मेरठ 9 चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय 10 सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रोद्योगिकी        विश्वविद्यालय 11 स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय 12 शोभित विश्वविद्यालय  गौतमबुद्धनगर (ग्रेटर नॉएडा) 13 गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय 14 शारदा विश्वविद्यालय 15 एमिटी विश्वविद्यालय 16 महामाया प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय सहारनपुर 17 ग्लोकल विश्वविद्यालय 18 शोभित विश्वविध्यालय मुरादाबाद 19 तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय

टीम इन्द्रप्रस्थ

अध्यक्ष:         पिंकी पंवार सत्यम संयोजक:       सत्यवीर सिंह लोनी सह संयोजक: डॉ गजेन्द्र सिंह-दिल्ली विश्वविद्यालय         "          फौजी ईश्वर पाल सिंह चौहान         "        सदस्य केन्द्रीय समिति: एवं सरंक्षक डॉ जयगोपाल शर्म श्री ओमपाल सिंह श्री राकेश त्यागी डॉ योगेश कुमार डॉ राकेश राणा डॉ जितेन्द्र नागर श्री कुलवीर बलवा श्री राज कपासिया मोहम्मद आमिर श्री महेश सैनी श्री योगेश रावल श्री विपिन चौधरी श्री अंजू प्रताप गुर्जर ...... ......

इन्द्रप्रस्थ राज्य निर्माण के लिए खड़े हो युवा.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 13 जिलों को दिल्ली में मिलाकर इन्द्रप्रस्थ राज्य का निर्माण करना, जिसकी राजधानी दिल्ली में हो, इस क्षेत्र की समस्त समस्याओं का एकमात्र हल है.          आधारभूत सरंचना में अविकास,कृषि क्षेत्र में आपातकाल जैसी स्थिति और आत्महत्या के कगार पर खड़ा कृषक समाज,औद्योगिक विकास में ठहराव और गुणवत्ता रहित शिक्षा तथा उसके फलस्वरूप बेरोजगारी इस क्षेत्र की प्रमुख समस्या के रूप में आज हमारे अस्तित्व को चुनौती दे रही है.हमे इन्द्रप्रस्थ चाहिए क्योंकि हम जिन्दा रहना चाहते है,हम आगे बढ़ना चाहते हैं, हमे इन्द्रप्रस्थ चाहिए क्योंकि हम देश को उसका प्राचीन आर्थिक, सामजिक गौरव प्रदान करना चाहते है..        इस क्षेत्र का एतिहासिक अस्तित्व है. इन्द्रप्रस्थ महाभारत कालीन कुरुक्षेत्र की राजधानी रही है.हस्तिनापुर भी महाभारत कालीन राजधानी है जो इस क्षेत्र में ही शामिल है.कुरुक्षेत्र आधुनिक हरियाणा राज्य के अंतर्गत शामिल है, इसलिए इन्द्रप्रस्थ इस क्षेत्र का सबसे उपयुक्त नाम होगा..       हम इन्द्रप्रस्थ राज्य प्राप्त करने के लिए अपनी...

जरुरत है खादर संस्कृति के उत्थान,प्रचार , एवं प्रसार की.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का खादर क्षेत्र एक भौगोलिक एवं सांस्कृतिक इकाई है. इस क्षेत्र की अपनी विविध संस्कृति है.उपजाऊ मिटटी के लिए सारी दुनिया के चुनिन्दा क्षेत्रों में यह शामिल है.वैसे तो हम दिल्ली से लेकर यमुना नदी के उत्तर के विशाल मैदान में प्रवेश करने के स्थान पौंटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) तक इसका अस्तित्व मान सकते है.इसमें मुख्यतः हम गंगा- यमुना के दोआब को शामिल करते है.लेकिन यमुना के तटों के सामानांतर खादर क्षेत्र की विशिष्टताएं अधिक स्पष्ट है. सांस्कृतिक रूप से धनी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किये जाने की आवश्यकता है, जो विलुप्त होती जा रही है..संगीत का विश्व प्रसिद्द किराना घराना इसी क्षेत्र की दें है लेकिन अपने जन्मस्थान कैराना से यह लगभग गायब हो चुका है. स्वांग परम्परा के लिए यह क्षेत्र विख्यात रहा है लेकिन इस विधा को सरंक्षण न मिलने के कारन यह विधा लगभग दम तोड़ चुकी है. रागिनी गायकी अभी तक जीवित है वह भी व्यक्तिगत प्रयासों से. वास्तव में अपनी समृद्ध संस्कृति होते हुवे भी इस क्षेत्र में अपनी संस्कृति के प्रति विशेष अनुराग का अभाव रहा है.यही कारण रहा है की इस क्षे...

इन्द्रप्रस्थ की स्थापना की जाये..

हरित प्रदेश का असामयिक एवं बेसुरा , अतार्किक राग अलापने वाले अजीत सिंह की इस समय अलग प्रदेश के मसले पर चुप्पी आश्चर्य चकित करने वाली बिलकुल नहीं है. कुछ लोगों को आश्चर्य हो सकता है लेकिन इसमे आश्चर्य की कोई बात नहीं है . हरित प्रदेश का मसाला अजीत के लिए एक चुनावी मुद्दा मात्र है..इसकी अवधारणा तक उनकी नहीं.सबसे पहले यह नाम पूर्व विधायक निर्भय पल शर्मा ने किया था..बाद में यह पूरा मसाला ही अजीत सिंह ने हथिया लिया. अब जबकि उत्तर प्रदेश में २०१२ का विधान सभा चुनाव सिर पर है और अजीत सिंह ने इस चुनावी मसले पर चुप्पी साधी हुई है. ऐसा अकारण नहीं है..वास्तव में सूत्रों के अनुसार अजीत सिंह चुनावी तालमेल के लिए कांग्रेस के संपर्क में है..यहाँ तक की उनकी पार्टी का, अजीत को कांग्रेस में सम्मान जनक रूप से समाहित होने की शर्त पर, विलय भी हो सकता है..अतः अजीत जी के लिए फायदे का सौदा यही है की वह तात्कालिक रूप से उनकी नजर में लाभरहित इस मुद्दे पर चुप रहे. मै छोटे राज्यों का पक्षधर हूँ.देश के त्वरित, एवं संतुलित विकास के लिए जरुरी है की इसको ५० छोटे राज्यों में बांटा जाये. दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्...